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Gold-Silver: मुनाफावसूली के बाद भी सोने-चांदी पर भरोसा कायम, Gold में 12% तक और तेजी का अनुमान

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | Gold-Silver Investment: सोने में 12% तक और तेजी की संभावना जताई गई है। Gold और Silver के लंबी अवधि के आउटलुक, ETF रिटर्न और निवेश जोखिम को समझें।

सोने और चांदी की कीमतों में हाल के दिनों में मुनाफावसूली देखने को मिली है, लेकिन इस गिरावट ने इन दोनों कीमती धातुओं की लंबी अवधि की निवेश कहानी को कमजोर नहीं किया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, वैश्विक ब्याज दरों में संभावित नरमी और निवेशकों की सुरक्षित एसेट की ओर दिलचस्पी जैसे फैक्टर आगे भी गोल्ड और सिल्वर को सपोर्ट कर सकते हैं।

Emkay Wealth Management के आकलन के मुताबिक, हालिया उतार-चढ़ाव को कीमती धातुओं के बड़े बाजार चक्र का सामान्य हिस्सा माना जा सकता है। रिपोर्ट में सोने के लिए करीब 4,060 डॉलर प्रति औंस के स्तर को महत्वपूर्ण सपोर्ट बताया गया है। दूसरी तरफ चांदी ने पिछले कुछ सप्ताह में करीब 58 डॉलर के स्तर को बनाए रखा है।

इसका संकेत यह है कि कीमतों में करेक्शन के बावजूद बाजार में पूरी तरह कमजोरी नहीं आई है। मौजूदा कंसोलिडेशन को आगे तेजी के नए चरण की तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है।

Gold की तेजी के पीछे सिर्फ बाजार का मोमेंटम नहीं

सोने में लंबे समय से जारी तेजी को केवल शॉर्ट टर्म खरीदारी से जोड़कर नहीं देखा जा रहा है। इसके पीछे कुछ बड़े वैश्विक कारण काम कर रहे हैं। केंद्रीय बैंक लगातार अपने रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। इसका एक बड़ा कारण विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने और किसी एक एसेट पर निर्भरता कम करने की कोशिश है।

इसके अलावा अगर प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में ब्याज दरों में नरमी आती है तो सोने को एक और महत्वपूर्ण सपोर्ट मिल सकता है। सोना नियमित ब्याज नहीं देता, इसलिए ब्याज दरें ऊंची रहने पर निवेशकों के लिए इसे रखने की अवसर लागत ज्यादा होती है। दरों में कमी आने पर यह अंतर घटता है और सोना निवेश के लिहाज से अधिक आकर्षक हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा Gold cycle अभी अपने ऐतिहासिक औसत चक्र की पूरी क्षमता तक नहीं पहुंचा है। इसलिए बीच-बीच में मुनाफावसूली के बावजूद लंबी अवधि में तेजी की गुंजाइश बनी हुई है।

Silver में ज्यादा रिटर्न, लेकिन जोखिम भी अधिक

चांदी ने भी पिछले कुछ समय में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। हालांकि Gold की तुलना में Silver ज्यादा अस्थिर एसेट माना जाता है। इसकी कीमत पर निवेश मांग के अलावा औद्योगिक गतिविधियों का भी असर पड़ता है।

इसी वजह से चांदी में तेजी के दौरान रिटर्न काफी तेज हो सकता है, लेकिन बाजार sentiment बदलने पर गिरावट भी अपेक्षाकृत ज्यादा देखने को मिल सकती है।

आने वाले समय में चांदी के लिए 68 डॉलर और 74 डॉलर प्रति औंस के स्तर महत्वपूर्ण resistance के रूप में देखे जा रहे हैं। ऐसे में Silver में निवेश करने वाले लोगों को अधिक volatility के लिए तैयार रहना चाहिए।

Gold ETFs ने एक साल में दिया 43% से ज्यादा रिटर्न

सोने की कीमतों में तेजी का असर Gold ETF के प्रदर्शन पर भी दिखाई दिया है। 31 जुलाई 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रमुख Gold ETFs ने एक साल की अवधि में 43% से ज्यादा रिटर्न दिया।

HDFC Gold ETF ने एक साल में 43.47 प्रतिशत, Kotak Gold ETF ने 43.53 प्रतिशत और Nippon India ETF Gold BeES ने 43.24 प्रतिशत रिटर्न दिया।

तीन साल की अवधि में भी प्रदर्शन मजबूत रहा। इस दौरान HDFC Gold ETF का रिटर्न 32.37 प्रतिशत, Kotak Gold ETF का 32.49 प्रतिशत और Nippon India ETF Gold BeES का 32.27 प्रतिशत रहा।

Gold Funds का भी प्रदर्शन मजबूत

Gold में निवेश करने वाले म्यूचुअल फंड आधारित उत्पादों ने भी निवेशकों को बेहतर रिटर्न दिया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक Gold Funds ने एक साल की अवधि में करीब 42 प्रतिशत तक रिटर्न दिया, जबकि तीन साल में कई योजनाओं का प्रदर्शन 31 प्रतिशत से ऊपर रहा।

इससे संकेत मिलता है कि सोने में तेजी का फायदा सिर्फ सीधे Gold खरीदने वालों को ही नहीं बल्कि बाजार से जुड़े निवेश उत्पादों के जरिए निवेश करने वालों को भी मिला है।

Silver ETFs ने Gold को भी पीछे छोड़ा

रिटर्न के मामले में इस अवधि में Silver से जुड़े ETF ने सोने को भी पीछे छोड़ दिया। 31 जुलाई 2026 तक ICICI Prudential Silver ETF ने एक साल में 95.24 प्रतिशत रिटर्न दिया, जबकि Nippon India Silver ETF का एक साल का रिटर्न 94.55 प्रतिशत रहा।

तीन साल की अवधि में ICICI Prudential Silver ETF ने 42.09 प्रतिशत और Nippon India Silver ETF ने 41.71 प्रतिशत रिटर्न दिया।

हालांकि, ज्यादा रिटर्न का मतलब यह नहीं है कि Silver कम जोखिम वाला निवेश है। चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के कारण निवेशकों को इसमें Gold की तुलना में ज्यादा volatility का सामना करना पड़ सकता है।

Silver Funds का प्रदर्शन भी 90% से ऊपर

Silver आधारित फंडों ने भी इस दौरान मजबूत प्रदर्शन किया है। उपलब्ध योजनाओं में एक साल का रिटर्न 90 प्रतिशत से अधिक रहा है। हालांकि, इतनी तेज तेजी के बाद कीमतों में correction की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

यही कारण है कि Silver में सिर्फ पिछले रिटर्न को देखकर निवेश करने के बजाय निवेशक को अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखना चाहिए।

Gold में 12% तक और तेजी का अनुमान

Emkay Wealth Management के ताजा अनुमान के अनुसार, सोने की कीमतों में मौजूदा स्तर से करीब 12 प्रतिशत तक अतिरिक्त तेजी की संभावना बन सकती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि कीमतें लगातार एक ही दिशा में बढ़ेंगी।

मुनाफावसूली और वैश्विक बाजारों में बदलाव के कारण बीच-बीच में गिरावट आ सकती है। निवेशकों के लिए ऐसी गिरावट को घबराहट की वजह के बजाय Gold के सामान्य price cycle के हिस्से के रूप में देखना महत्वपूर्ण हो सकता है।

निवेश से पहले जोखिम समझना जरूरी

Gold और Silver को पोर्टफोलियो में शामिल करने से diversification में मदद मिल सकती है। दोनों कीमती धातुएं दूसरे पारंपरिक asset classes से अलग व्यवहार कर सकती हैं, जिससे पूरे पोर्टफोलियो का जोखिम संतुलित करने में मदद मिल सकती है।

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हर निवेशक को एक जैसी मात्रा में Gold या Silver खरीदना चाहिए। निवेश का फैसला व्यक्ति की risk appetite, investment horizon, मौजूदा portfolio और asset allocation strategy के आधार पर होना चाहिए।

खासकर Silver में हाल के शानदार रिटर्न को देखकर जल्दबाजी में बड़ा निवेश करने से बचना जरूरी है। वहीं Gold में लंबी अवधि की मजबूती की संभावना होने के बावजूद short-term correction के लिए निवेशक को मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए।

मौजूदा संकेत क्या बताते हैं?

कुल मिलाकर हाल की मुनाफावसूली के बावजूद Gold और Silver की लंबी अवधि की कहानी में बड़ा बदलाव नजर नहीं आ रहा है। केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और ब्याज दरों में संभावित नरमी Gold के लिए सकारात्मक संकेत हैं। Silver को औद्योगिक मांग के साथ-साथ निवेश मांग का भी सहारा मिल रहा है।

हालांकि, दोनों धातुओं में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इसलिए निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल तेजी देखकर निवेश का फैसला न लें, बल्कि अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता के हिसाब से asset allocation करें।

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जरूरी बात

Gold और Silver के पिछले रिटर्न भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं हैं। किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति, जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखना चाहिए। जरूरत पड़ने पर SEBI-registered financial adviser से सलाह लेना बेहतर है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट उपलब्ध बाजार विश्लेषण और विशेषज्ञ आकलन पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी को व्यक्तिगत निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए। निवेश से पहले स्वतंत्र वित्तीय सलाह लेना उचित है।

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डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट उपलब्ध बाजार विश्लेषण और विशेषज्ञ आकलन पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी को व्यक्तिगत निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए। निवेश से पहले स्वतंत्र वित्तीय सलाह लेना उचित है।

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